ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: क्या भारत ने चीन की 'दुखती रग' पर हाथ रख दिया है?

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यह वीडियो ग्रेट निकोबार आइलैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के भू-राजनीतिक (Geopolitical) और पर्यावरणीय पहलुओं पर एक बहुत ही संतुलित और गहरी जानकारी देता है। आपकी वेबसाइट के लिए एक प्रोफेशनल और एंगेजिंग ब्लॉग पोस्ट ड्राफ्ट यहाँ दिया गया है: ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: भारत की सामरिक शक्ति या पर्यावरण के साथ खिलवाड़? भारत एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और सुरक्षा की दृष्टि से गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इसे 'ग्रेट निकोबार आइलैंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट' के नाम से जाना जा रहा है। लेकिन, जैसे-जैसे काम आगे बढ़ रहा है, इसे लेकर देश के भीतर ही सवाल उठने शुरू हो गए हैं। आखिर क्या है यह प्रोजेक्ट और क्यों यह इतना विवादों में है? भारत के लिए क्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट? यह प्रोजेक्ट करीब 72,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें एक ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट, एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एक नया स्मार्ट सिटी बनाने का प्रस्ताव है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी लोकेशन है। मलक्का स्ट्रेट (Strait of Malacca): यह दुनिया के सबसे बिजी ट्रेड रूट्स में से एक है। दुनिया का 40% व्यापार इसी रास्ते से होता है। चीन की 'दुखती रग': चीन का 80% तेल आयात मलक्का स्ट्रेट से होकर गुजरता है। अगर भारत निकोबार में मजबूत होता है, तो चीन की सप्लाई लाइन पर भारत का सीधा प्रभाव होगा। ### पर्यावरणीय चिंताएं: विकास की कीमत? सिक्के का दूसरा पहलू थोड़ा चिंताजनक है। पर्यावरणविदों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के लिए: 1. 1 लाख से ज्यादा पेड़ काटे जा सकते हैं। 2. करीब 130 स्क्वायर किलोमीटर का घना जंगल प्रभावित होगा। 3. यह इलाका *'लेदरबैक सी टर्टल' (Leatherback Sea Turtle) का प्राकृतिक आवास है, जो खतरे में पड़ सकता है। 4. वहां रहने वाले आदिवासी समुदायों के जीवन पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा। दोहरा मापदंड? वीडियो में एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया गया है—जब चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर मेगा डैम बनाता है या साउथ चाइना सी में आर्टिफिशियल आइलैंड्स तैयार करता है, तब कोई वैश्विक अभियान नहीं चलता। लेकिन जब भारत अपनी सुरक्षा के लिए कुछ करता है, तो पर्यावरणीय मुद्दे अचानक बड़े हो जाते हैं। निष्कर्ष: क्या होना चाहिए सही रास्ता? सच तो यह है कि भारत को इस प्रोजेक्ट की जरूरत है, लेकिन बिना सोचे-समझे नहीं। समाधान 'स्मार्ट बैलेंस' में है। हमें न तो अंधा विकास चाहिए और न ही हर प्रोजेक्ट का अंधा विरोध। आपकी क्या राय है? क्या भारत को अपनी सुरक्षा और सामरिक शक्ति के लिए इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना चाहिए या पर्यावरण को प्राथमिकता देनी चाहिए?

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